Anushka Sharma- Virat Kholi: अनुष्का शर्मा (Anushka Sharma) के पति और क्रिकेटर विराट कोहली ने 12 मई को टेस्ट क्रिकेट से रिटायरमेंट का एलान किया था। इस घोषणा के बाद “विरुष्का” अब वृंदावन में प्रेमानंद महाराज की शरण में जा पहुंचे है। सोशल मीडिया पर दोनों की वीडियो भी सामने आई है।
क्या वह खुश हैं
“विरुष्का” का महाराज से बातचीत करने वाला भी वीडियो सामने आया है, जिसमे प्रेमानंद महाराज जी ने पूछा कि क्या वह खुश हैं, तो दोनों ने मुस्कुराते हुए हामी भरी। साथ ही महाराजा जी ने उन्हें जिंदगी और भक्ति के बारे में समझाया।
सादगी में दिखे ‘विरुष्का’
इस मौके पर ये कपल बिना किसी तामझाम के साधारण से कपड़ों में नजर आया और सादगी के साथ संस्कार दिखा दिल जीत गए। विराट सी ग्रीन कलर की शर्ट और ब्लैक ट्राउजर पहनकर यहां आए। इस पर उन्होंने चश्मा लगाया था।
अनुष्का ने बेज कलर का सूट सेट पहना था, जिसकी वी नेकलाइन को ब्लैक थ्रेड से कढ़ाई करके हाइलाइट किया। तो बाकी के सूट पर फूलों की बेल वाला पैटर्न बना है।
आश्रम में साढ़े तीन घंटे रहे कोहली-अनुष्का
कोहली और अनुष्का ने संत प्रेमानंद के आश्रम में साढ़े तीन घंटे से भी ज्यादा समय बिताया। दोनों सुबह करीब छह बजे आश्रम पहुंचे और करीब साढ़े नौ बजे वहां से निकले। अब टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद उन्होंने संत प्रेमानंद से गहन चर्चा की। इस दौरान विराट ने पूछा कि असफलता से कैसे बाहर निकला जाए? इस पर प्रेमानंद ने कहा कि अभ्यास करना जारी रखें।
अनुष्का शर्मा का सवाल: बाबा क्या नाम जप से हो जाएगा?
संत प्रेमानंद: पूरा। ये हम अपने जीवन का अनुभव बताते हैं। सांखयोग, अष्टांगयोग, कर्मयोग और भक्तियोग, चारों योगों में प्रवेश रहा है। स्वयं भगवान शंकर से बढ़कर तो कोई ज्ञानी नहीं है। सनकादि से बढ़कर कोई ज्ञानी नहीं है। सनकादि ‘हरिशरणम, हरिशरणम’ हमेशा जपते रहते हैं। भगवान शिव राम राम राम राम जपते रहते हैं। हम वृंदावनवासी प्रिया प्रितम के उपासी राधा राधा जपते हैं। जो राम में रा है और जो धा है वो रस देने वाली वस्तु है। हमारी तार्किक बुद्धि रही है श्रद्धालु बुद्धि नहीं रही है। तो अगर आप राधा राधा जपते हो तो इसी जन्म में भगवत की प्राप्ति होगी।
हमारी आखिरी सांस अगर राधा कहती है तो सीधे श्री जी की प्राप्ति, भगवान की प्राप्ति हो जाएगी। इसमें कोई संशय नहीं और किसी साधन की कोई आवश्यकता नहीं। अगर आप राधा लिख रहे हो तो मन भागेगा नहीं। तो चाहे 10 बार लिखो या 100 बार लिखो, लेकिन एक अभ्यास बनाओ। कुछ समय शांति से स्नान आदि करके राधा-राधा लिखें और फिर उसी का चिंतन भी करें। इसे अपना जीवन बना लें फिर आप परिणाम खुद देख लेना। कोई घाटे का सौदा तो है नहीं। ठीक है।
